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रविवार, 24 जनवरी 2016

ये दिन भी अपने थे - 71



पहली तीज पर हम लोग छत्तीसगढ़ मे अपने मायके मे रहते है ।मै तो जून मे ही चली गई थी ।वहाँ पर सारे त्योहार मैने बहुत अच्छे से मनाये क्योंकि इसके बाद तो मुझे सारे त्योहार ससुराल मे ही मनाने थे ।तीज एक ऐसा त्योहार है जिसे मरते तक मायके मे ही मनाते हैं । तीज यहां पर तीन दिन का होता है ।उपवास के पहले दिन रात को करु भात खाते है।रात को करेले की सब्जी और चेंच भाजी के साथ पूरा खाना खाते है।

इस दिन बेटियों को गांव मे बहुत से घरों मे खाने बुलाया जाता है । सभी घर पर थोड़ा थोड़ा सा चांवल याने भात के साथ करेले की सब्जी खाते है ।इसके खाने से दूसरे दिन प्यास नहीं लगती है और शरीर का पित्त शांत रहता है ।दूसरे दिन उपवास रहते है ।इसी दिन तिखुर सिंघाड़ा और पूड़िया बना कर रख लेते है ।रात को शंकर जी की पूजा की जाती है कुछ लोग मंदिर मे जाकर शिवलिंग की पूजा करते है ।कुछ लोग घर पर या तालाब के किनारे के शिवलिंग मे जाकर पूजा करते है कुछ लोग घर पर फुलेरा रखते है ।हम लोग घर पर ही पूजा करते थे ।

इस दिन शाम को मेरे पति आये और पूछे कि उपवास हो कि नहीं ।मैने हाँ कहा और चाय भी नहीं पीये चले गये ।उपवास के दिन सुबह बिना बात किये नहाते है और चिड़चिड़ा का दातौन करते है ।इसका वानस्पतिक नाम टेफरोजिया परपुरिया है ।यह गले मे तरावट बनाये रखता है और खांसी भी नहीं आने देता है ।हम लोग रात को मेंहदी लगा लिये थे ।मेरी दोनों बुआ आई हुई थी ।तीसरे दिन सुबह उठ कर नहा कर शिवलिंग की पूजा किये आरती किये ।उसके बाद बूंदी कढ़ी और भात पकाये । माँ ने सबको साड़ी के साथ पूरे सुहाग का सामान दिया । हम साड़ी और नई चूड़ी पहन कर आलता लगा कर तैयार हो गये ।

सुबह सभी ने फलाहार कर लिया ।दस बजे खाना खाने बैठते वैसे ही ये आ गये ।अब तो बुआ ने मजाक मे कह दिया ।बहुत दिन हो गये तो कल से आ रहे है अब आज ही ले जायेंगे ऐसा लग रहा है ।हम लोग खाना खाने बैठ गये ।खाना खाने के बाद माँ ने उनको फलाहार खाने दिया वे मुझसे पूछते है तुम उपवास के बाद सुबह यह खाई थी ? मैने हां कहा तो वे भी खा लिये ।बहुत देर के बाद जब हम लोग और घरों से खा कर आ गये तब माँ ने कहा खाने के पूछ लो मैने उनसे खाना खाने के लिये कहा तो तुरंत उठ गये खाने के लिये ।

मैने उन्हे चौके मे ही खाना दिया तो बताये कि मै भी उपवास था मैने कहा कि आप क्यों उपवास थे तो कहते हैं कि तुम मेरे लिये उपवास रह सकती हो तो मै तुम्हारे लिये क्यो नहीं रह सकता ? मैने तो अपने जीवन मे ऐसी बात सुनी नहीं थी ।खाने के बाद मैने माँ को बताया कि ये उपवास थे ।माँ तो न ही हंसी और नहीं कुछ बोली ।शाम तक रुके थे ।मुझसे पूछे कि कब चलोगी ? मैने कह दिया अभी नहीं जाना है तो वे बताये कि घर पर गणेश रखते है अच्छा लगेगा चलो ।मेरी तो जाने की इच्छा ही नहीं थी ।वे चले गये ।

शाम तक तो हम लोग अपने मे लगे रहे । माँ को कुछ याद नहीं रहा ।रात को माँ ने कहा कैसे तीजा उपवास रह गया तेरे को बहुत प्यार करता है तभी तू खाना नहीं खाई तो वह भी नहीं खाया ।मै तो बस मुस्कुरा दी ।

अब नवरात्र मे मेरे जाने की तैयारी शुरू हो गई ।कपड़े खरीदे कुछ जरुरत के समान के साथ सूटकेश तैयार हो गया ।दशहरे के दिन शाम को रावन मारने के बाद खाना खाये और रिक्से से अपने ससुराल के लिये निकल पड़ी ।शादी के बाद सिर्फ नौ दिन ही ससुराल मे थी ।इतने दिन मायके मे रहने के बाद वापस ससुराल जाना मन को बोझिल कर रहा था । पांच किलोमीटर की दूरी मे मन के विचारो मे भी उथल पुथल हो रही थी ।जेठानी का व्यवहार याद आ रहा था जिसने मुझसे अभी तक खाना नही बनवाया था ।

विचारो का तार टूट गया हम लोग अपने घर पहुंच गये थे ।दरवाजे पर अंदर सांकल लगी थी जिसे मेरे पति ने खोला और हम अंदर आ गये ।जब अपने कमरे की सीढ़ी की तरफ जा रहे थे तभी हमारी सास निकली और मैने प्रणाम किया ।हम लोग अपने कमरे मे चले गये ।

मैने देखा कि मेरे पति ने अपने नीचे का कमरा छोड़ दिया था और अपने कुछ सामान के साथ इस कमरे मे आ गये थे ।वह पहिली रात थी जब हम लोग एक कमरे मे एक साथ थे ।

सुबह पांच बजे उठ गये और योगा करने नीचे चले गये ।मुझसे कह कर गये कि मेरे लिये टिफिन तुम बनाना ।मेरी तो जान सुखने लगी ।मैने तो अभी तक चौके के किसी सामान को भी नहीं देखा था ।मै नीचे आई तो मेरी सास सब्जी काट रही थी ।मै वही पर बैठ गई ।पर वह काम करती रही ।आटा गुंदी तब मै रोटी बेलने लगी ।वह स्वयं एक पीतल के रोटी के डिब्बे मे पांच रोटी और आलू की सब्जी रखी ।मैने देख कर सीख लिया ।

ये नहा कर आये फिर दाल भात सात बजे ही खा लिये।तैयार होकर टिफिन लेकर रेलवे स्टेशन की ओर चले गये । तीज का उपवास ये मेरे पूरे जीवन रहे ।मुझे पेट की समस्या है गई तै मैने उपवास छोड़ दिया तो भी वे रहते थे।मुझे एक ही बात कहते थे " तू मेरे जीवन के लिये उपवास रह सकती है तो मै तेरे लिये नहीं रह सकता क्या ?" अपनी इस बात पर पूरे जीवन अमल करते रहे ।क्ई लोग हंसते थे और क्ई लोग इसे बहुत
अच्छे नजर से देखते थे ।

मै हर साल तीज मे इस बात की कमी सहसूस करती हूँ ।अब पूरा उपवास नहीं रहती पर मेरा मन अंदर से जरुर रोता है ।

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