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रविवार, 24 जनवरी 2016

ये दिन भी अपने थे - 28


राखी और बहन का अटूट सम्बंध है ।राखी पर माँ राखी निकाल रही थी और मैं देख रही थी मैने माँ से पूछा "मै किसको राखी बांधूगी ।" माँ ने कहा "कृष्ण भगवान को "दीदी ने कहा हमारे भाई तो कृष्ण हैं ।हमने कृष्ण भगवान को राखी राखी बांध दिये ।मैं उत्सुकता से सबके हाथों में राखी देखकर सोचती थी हमारा ऐसा भाई नहीं है ।उस भाव को महशूस करती हूँ तो दिमाग में आता है "जीता जाता व्यक्तित्व ।"

उसी साल मेरा भाई मुन्ना पैदा हो गया ।आठ फरवरी उन्नीस सौ उनसठ की बात है । तीन साल की उम्र की सोच उसके हाथ को छूती थी ।मां ने पूछा तो कह दी कि राखी बांधेंगे ।माँ ने सहजता से हाँ कह दिया । जब ईदगाहभाठा में रहने गये तो क्ई लोगों से सम्बन्ध बने ।घर में मेरे मामा आते थे बड़ी बुआ की बेटी नहीं थी उनके बेटे हमारे रह कर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे ।एक मामा का एकलौता बेटा था ,वह भैय्या हमारे घर रह कर एम एस सी कर रहे थे ।इन सब को राखी बांधती थी ।

जब दीदी शादी के बाद रायपुर शंकर नगर में रहने लगी तो वह भी आती थी ।इसके अलावा बहुत से लोग मिलने आ जाते थे सब लोग खाना खाते थे ।कुछ लोग नाश्ता करते थे ।शाम को चार बजे चाय पीकर सब चले जाते थे ।शाम को माँ घर के दरवाजे पर बैठ जाती थी ।दो चार लोग आ कर सब के बारे में पूछताछ करते थे ।
पास में स्वर्णसिंह सिख परिवार रहता था ।उसके दो बेटे थे ।एक साल वह अपने बड़े बेटे सुकदेव को लेकर आई ।एक बड़ी थाली में गुलाबी रंग का रेशमी कपड़ा ,फल और मिठाई साथ में दस रूपये रख कर लाई ।साथ मे सुगदेव था ।वह मुझसे एक साल बड़ा था ।हम लोग उन्हें मौसी कहते थे ।मौसी ने माँ से कहा " दीदी बेबी इसको राखी बांध देगी क्या ये रो रहा है ।मै यह लेकर आई हूँ ।और कुछ देते हों तो बताना मैं ले आऊंगी ।"

बैठक के सारे लोग मौसी को देखने लगे।मां असमंजस में थी ।अचानक मामा बोले बच्चे हैं बांध दो ।मैने उसे राखी बांध दी । सब चले गये ।शाम को माँ ने कहा ये सब लेकर मत आना ।बच्चे है राखी बंधा लेगा ।

हमारे घर का आंगन तीन चार घरों से दिखता था ।वे सभी सिंधी थे ।चौक में घर था तीन तरफ रोड था ।हमारे घर की बैलगाड़ियां ,हमारे घर के मेहमान ,तीज त्यौहार की रौनक सबको आकर्षित करती थी ।एक माखीजा परिवार का छोटा लड़का हमारे घर सुबह से आ जाता था ।मुझसे छै सात साल छोटा था ।भाई के साथ कभी कभी खेलता था ।

एक साल उसे उसकी माँ लेकर आई ।वह रो रहा था ।उसकी माँ ने कहा यह रो रहा है कि दीदी मुझे राखी नहीं बांधती है ।वह वास्तव में सुबह दस बजे से हमारे घर में ही रहता था । दो तीन बजे उसकी माँ बुला कर ले जाती थी ।उस दिन वह घर जाकर बहुत रोया तो उसकी माँ उसे लेकर आई ।उसकी चार बड़ी बहने थी एक भाई था वह सबसे छोटा था ।माँ ने कहा राखी बांध दे ।मै उसे राखी बांध दी ।

अब हर साल इनके साथ बहुत से लड़के राखी बांधते समय आ जाते थे । दोनों घर से दो रेशमी सलवार शूट का कपड़ा आता था ।कुछ साल के बाद सुखदेव की बहन पैदा हो गई ।उसके कुछ साल के बाद बिमार होने के कारण उसकी मृत्यु हो गई ।सिंधी भाई कैलाश आज तक राखी बंधवाने आता है ।बाकी तीनो भाई को राखी भेजती हूँ ।मामा का लड़के मेघाश्याम वर्मा भैय्या दुर्ग में रहते हैं।बुआ का लड़के मनहरण वर्मा भैय्या भिलाई में रहते है ।

सम्बन्ध राखी बांधने का कृष्ण भगवान से शुरु हुआ और आज चार भाई हैं। आज भी वह छण याद आता है जब माँ ने कहा था " कृष्ण भगवान ही हमारे भाई हैं ।"आज भी पहले कृष्ण को राखी बाद में दूसरे को बांधती हूँ क्योंकि कोई आता नहीं ।हाँ कैलाश किसी भी समय आता है ।उसका आना बिल्कुल तय रहता है सुबह से आने का समय बता देता है ।

आज फैशन में राखी बंधवा लेते है ।एक साल बांध कर बाद में छोड़ दिये ।मैंने इस तरह की राखी किसी को नहीं बांधी ,मेरे कृष्ण है न ।

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