रविवार, 1 मई 2016

कविता -नन्ही परी की पहली सुनहरी सुबह

नन्ही परी की पहली सुनहरी सुबह।
बधाई हो तुम्हें इस दुनिया में
आने के लिये
पिता को नन्हे हाथों से छुने के लिये
बाट जोहती माँ को
अपनी किलकारी सुनाने के लिये
अब गुंजेगी तुम्हारे पायल की छुनछुन
सजे कमरा तुम्हारे घरौंदो से
साड़ियों से बनाओगी घर तुम
छोटे छोटे हाथों से
बनेगी रसोई तुम्हारी
आंगन की अल्पनाओं में डडियां खींचती
जीवन को जोड़ना सीखती
रंगोली में रंग भरती
जीवन को रंगने के लिये
अपने को तैयार करती
आ गई नन्ही परी ।
सुनहरे रंगो से भरा हो
जीवन तुम्हारा
सूरज ने भेजा है
आशीष तुम्हें
अपनी पहली
किरण से
हवा ने भेजी है खूशबू
अपने चमन से
चिड़ियो की चहचहाहट ने
जीवन से लड़ने का पैगाम भेजा है
प्रकृत देगी हमेंशा साथ तुम्हारा
क्योंकि सूरज ने सबको
पहली किरण से मुस्कान भेजा है
माँ की मुस्कुराहट हो तुम
पिता का प्यार हो तुम
घर की शान हो तुम
ले लो पहली किरण की
बधाई तुम
ले लो पहली किरण की
बधाई तुम ।
सुधा वर्मा , रायपुर
9-10-2015

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