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रविवार, 1 मई 2016

कविता -श्रद्धांजलि,पवन दीवान जी को


एक दीवाना चला गया
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आया एक पवन का झोका
दीवाना था वह
छत्तीसगढ़ का ।
जन्मा था वह इस माटी पर
लड़ा था इस माटी के लिये
इस कारण पुकारा सब ने
छत्तीसगढ़ का गांधी।
छत्तीसगढ़ी को बना हथियार
करता रहा अट्हास ।
एक हंसी की गूंज सुन उनकी ,
दौड़ पड़ते सब
कब पहना गेरुवा ,
पता ही न चला ।
छत्तीसगढ़ की धरती
और भाषा के लिये लड़ा सदा ।
पावन धरती राजिम
बनी उसकी अपनी धरा ।
छोड़ा नही समाज को ,
बन सांसद रहा अपनो के बीच ।
जीवन की सीख सिखाते ,
नैतिकता का पाठ पढ़ाते
धर्म को दिशा देते
ले लिया एक विश्राम ।
त्रिवेणी की पावन धरती पर ,
लगा हुआ है कुंभ का मेला ।
आये हजारोंं संतो के बीच,
चुना एक नई राह।
कहा संत ने ,
करो विदा मुझे ,
जाना है अब अपने धाम ।
हजारों संतो ने किया ,
उसके जाने की राह आसान ।
गया संत पवन दीवान ,
छोड़ गया अपने
आदर्शो का पाठ ।
नैतिकता की बात ,
अपनी भाषा ,
अपनी धरती का प्यार ।
कह गया ,आँसू नहीं मुझे ,
भाषा का प्यार देना ,
अपनी धरती को कभी छोड़ न जाना ।
पवन का झोका चला गया ,
छत्तीसगढ़ की धरती का दीवाना
चला गया ।
स्वर्ग है यहीं ।
स्वर्ग है यहीं।
सुधा वर्मा -2-3-2016
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