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रविवार, 1 मई 2016

ये दिन भी अपने थे - 92

बेटे अपूर्व के जन्मदिन पर हम लोग बहुत से लोगों को बुलाये थे ।उसके पैदा होने पर हम लोग किसी को मिठाई नही खिलाये थे ।मेरे पति ने तो कह दिया था कि बेटी होती तो मिठाई खिलाता ।मेरी माँ ने जो आये उसे घर पर बनाया गया मिक्सचर और गुलाब जामुन खिला दिया था ।मेरी माँ भी खुशियाँ मनाना नही चाहती थी ।मै तो बिल्कुल भी नहीं मनाना चाहती थी

बहुत से लोगों को धीरे धीरे पता चला कि हमारे घर बच्चा हुआ है ।लोग बिना बुलाये धीरे धीरे आने लगे थे ।मै काजू और बादाम रखी थी ।जो आता था उसे वही खिला देती थी ।हद तो तब हो गई जब कई लोग मुझे बेटे को दूध पिलाते हुये देखना चाहते थे ।बेटा थोड़ा सा भी रोये तो दूध पिला दो कहते थे ।कहीं पर शक था कि यह बच्चा दूसरे का तो नही हैं ।मैने गोद लिया है और अपना बता रही हूँ ।लोग बहुत देर तक बैठते थे ।यदि कमरे के अंदर जाकर दूध पिलाती थी तो महिलाएं अंदर आकर देखती थी ।

एक बार मजेदार किस्सा हो गया ।हमारे पड़ोस मे रहने वाली तालुकदार आईं तो बच्चे को देखकर आश्चर्य मे पड़ गईं ।मुझसे पूछीं कि किसका बच्चा है? क्योंकि उन्हें घर बेच कर गये एक साल ही हुआ था ।तब तक बच्चा हो गया था ।मै उन्हे अपने सोनो ग्राफी दिखाई थी ।तब उसने नई बात बताई थी कि इंजेक्शन लगाने से भी महिलाओं को दूध आने लगता है।यह बात तो मै आज तक नहीं सुनी हूँ।तब उन्हे विश्वास हुआ कि अपूर्व मेरा बेटा है।

अब हम लोग पहले जन्मदिन की तैयारी मे लग गये ।सब कुछ घर पर ही बनाये थे ।मेरे मन का संदेह मिट चुका था ।यह बच्चा रहेगा कि नही यहीं मन मे आते रहता था ।प्यार तो करती थी पर हर खुशी के पहले सचेत हो जाती थी ।नारियल की बर्फी बनाई थी ।गुलाबजामुन और मिक्सचर भी रखी थी ।खीर ,छोले पूरी और पुलाव बनाई थी ।साथ में रसना था ।तब रसना नया नया आया था ।लोग बड़े शौक से पीते थे ।

मै कालोनी के सभी बच्चों को बुलाई थी ।बैंक स्टाफ के लोग आये थे ।माँ सुबह से आई थी ।काका आये थे ।दीदी का पूरा परिवार था ।शाम पांच बजे से आना शुरू हुआ।छोटे बच्चो के निपटने के बाद बड़े लोग आये ।रात दस बजे तक आना जाना चलता रहा ।आज से पच्चीस साल पहले इस तरह से जन्मदिन भी कम लोग ही मनाते थे ।इतने लोगों को देखना भी अपूर्व के लिये आश्चर्यजनक था ।उसी रात को उसको बुखार भी आ गया ।यह सिलसिला आज तक जारी है। वह अपने जन्मदिन के समय बिमार पड़ता ही है ।मौसम बदलता है जो उसको बिमार कर देता है ।बाद मे उसे एलर्जी भी हो गई ।बहुत जल्दी सर्दी बुखार हो जाता है ।जुलाई अक्टूबर और मार्च मे तबियत खराब होती ही है ।डाक्टरों ने कहा कि प्रतिरोधक क्षमता कम है इस कारण बिमार पड़ जाता है ।जन्मदिन  के समय मे चौदह जुलाई या पंद्रह जुलारी तय समय है ।

कई लोगों ने कहा जन्मदिन मत मनाओ ,मैने वह भी करके देख लिया पर वह वैसे ही होता था ।अपूर्व को अपना जन्मदिन मनाने का बहुत शौक है ।हमारा परिवार नहीं है ।दीदी और उनके बच्चे ही आते है।स्कूल जाने लगा तो उसके पांच छै दोस्त का परिवार आता था और बहुत से बच्चे आते थे ।पूरे स्कूल मे नारियल की बर्फी और टॉफी बांटता था ।उसे किसी को कुछ देने मे अच्छा लगता था ।घर पर भी रिटर्न गिफ्ट की अच्छी तैयारी करता था ।सबको रबर ,पेंसिल,कटर का सेट देता था ।

हम लोग बहुत बड़े बड़े फुग्गे लगाते थे ।घर मे गणेश रखते हैं उसी  तरह से सजाते थे ।पांच छै साल का हुआ तो वह स्वयं सजाने लगता था ।उस दिन उसके पापा छुट्टी लेकर सजाते थे ।पहले दिन शाम को दोनो क्रेप पेपर ,और सजावट का सामान,गिफ्ट देने का सामान लेकर आते थे रात से ही सजाने मे ल जाते थे ।शाम को गाना बजते रहता था ।इसके पापा रफी के फैन थे और अच्छा गाते भी थे ।गाना चार बजे से लगा देते थे और गाते रहते थे ।बच्चों के आने के बाद ही गाना बंद होता था ।तब टेप के साथ साथ फिलिप्स का मेजर मॉडल का रेडियो था ।खाने के बाद बच्चे डांस करते थे तब गाना चलता था ।

घर के आस पास पानी भरा रहता था ,कई प्लाट खाली थे ।सांप निकलता था ।कई बार घुटने तक पानी भरा रहता था तो उसे पार करके लोग आते थे ।पहले पानी भी इसी दिन अधिक गिरता था ।पानी गिरने से अपूर्व उदास बैठ जाता था कि अब कोई नही आयेगा पर सब रात को अपने पापा के साथ आ जाते थे ।अपूर्व बहुत खुश हो जाता था ।उसके दोस्त भी उसके जन्मदिन का इंतजार करते थे ।आज भी सब नौकरी मे चले गये है पर जो भी रायपुर मे आता है या रहता है वह बिना बुलाये आ जाता है ।आज ये लोग दो दोस्त ही रायपुर मे हैं ।अपूर्व को कई बार बोली कि चलो होटल से खा कर आ जाते हैं पर वह तैयार नही होता है ।वह उस दिन सुबह से उदास रहता है।पूरे दिन कुछ नही बोलता है ।शाम को हर आहट पर दरवाजे की तरफ देखता है ।उसेके दोस्त की मम्मी आती है ।वह उसका ही इंतजार करता है ।क्योंकि वह उसका बहुत ध्यान रखती है ।

वह अपने जन्मदिन पर अपने पापा को याद करता है ।आज भी वह अपने जन्मदिन के सजाने के डिब्बे को देखता है जिसमे बहुत सा सामान पड़े पड़े खराब हो रहा है।उसका उपयोग वह गणेश को सजाने मे करता है ।जो कुछ भी उसके साथ हुआ अच्छा और बुरा शायद यह सब वह याद करता है।कभी कभी बैठे बैठै सो जाता है ।

वह जब पैदा हुआ तो मै उसे कपड़े खरीद कर नही पहनाई।पहले जन्मदिन मे माँ और दीदी ने खरीदा था ।दूसरे जन्मदिन के लिये एक माह पहले माँ ने एक गुड़िया और एक जोड़ी कपड़ा खरीद कर रख लिया था ।पर मेरी माँ चार दिन की तकलिफ में अचानक चल बसीं .तीन जुलाई को खतम हुईं और तेरह जुलाई को दशगात्र हुआ ।चौदह जुलाई को अपूर्व का जन्मदिन था ।मेरी भाई बहु इंदु ने खीर पुड़ी बना कर अच्छे से उसका जन्मदिन मनाया ।हम सब माँ के घर पर ही थे ।उसके बाद से हर साल इंदु उसके लिये कपड़े खरीदती है ।वह जून मे अपने मायके आती थी तभी कपड़े खरीद कर छोड़ देती थी ।यह सिलसिला आज तक है।दीदी भी कभी खरीदती है नहीं तो दीपावली मे देती है।वह आज तक दिये हुये कपड़े ही पहनता है ।

उसको मै ग्यारह साल तक घर के कपड़े नही पहनाती बोली थी उसे पूरा की । मै ग्यारवें साल पूरा होने पर सत्यनारायण  की पूजा करा कर ग्यारह बच्चों को कपड़े बांटी थी ।पर उसके बाद भी मै अभी तक कपड़े  नही खरीदी हूँ ।

उसके दोस्त भी उसका बहुत ध्यान रखते है ।उसका जन्मदिन याद रखे हैं ।उसके लिये खुशी की मिठाई मै कभी नही बांटी । जो भी खिलाती हूँ भगवान मे चढ़ा कर ।उसके पास होने की मिठाई भी उसके दोस्तो के घर के लोग ही खिलाते रहे।एक बात है कि केक मै पहले जन्मदिन से आजतक घर पर ही बनाती हूँ ।वह उसी मे बहुत  खुश रहता है ।उसके पहले जनमदिन का सिलसिला आज तक चल रहा है ।पूरे साल की हर खुशी को एक दिन ही मनाते है।

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