रविवार, 26 जुलाई 2020

कोरोना एक संकेत

आज कोरोना वायरस की महामारी फैली हुई है। इसके लिये पूरा विश्व काम कर रहा है। करेगा ही सोशल मिडिया है जो एक सेकेंड में किसी भी समाचार को पूरे विश्व में पहुंचा देता है। सबको अपने जिन बचाने के लिये कुछ तो करन पड़ता है। कोरोना वायरस चीन का आयातित है। चीन से तो सालों से सस्ती चीजें आ रही थी। यहां तक की हमारे पूजा के सामान, दीपावली के सजावट के सामान होली के रंग भी वहीं.से आते हैं। सस्ता होने के कारण लोग यही खरीदते हैं। हमारे यहां का सामान रखा रहता है।
हमारे देश से अलग खानपान होने के कारण भी चीन को जाना जाता है। मांसाहारी हैं चीन के लोग, ये लोग पके मांस के साथ कच्चा मांस भी खाते हैं। चमगादड़ का सूप और सांप के खाने से कोरोना फैल गया। बहुत ही तेजी से फैलने लगा। यह दूसरे देश तक पहुंच गया। सभी जगहों में मांस खानि बंद कर दिये।अंडा भी बंद हो गया। यह छूने से भी फैलता है तो लोगों ने हाथ मिलाना बद कर दिया। उस समय भारत सबसे आगे रहा क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने सबको हाथ जोड़ कर नमस्ते करना शुरु कर दिया। विश्व में भारत की धाक तो जम गई पर भारत की संस्कृति को सब जानने और पहचानने लगे।
कोरोना में सूखी खांसी और बुखार रहता है साथ में सांस लेने में तकलीफ भी होती है। इसके रोकथाम के लिये कोई दवाई भी नहीं है और न कोई टीका है। बस सब जगह को किटाणुरहित करना है ,अपना हाथ हर दो घंटे में धोते रहना है। इसके 245850 मामले विश्व में सामने आये हैं जिसमें से 10047 लोगों की मौत हो गई है। भारत में भी चार केस आये हैं। जब भी संक्रमित व्यक्ति मिलता है उसे आयसोलेशन में 15 दिन तक रखा जाता है। दो बार उसकी जांच होती है। नये सामानों के साथ कई अस्पताल के कमरे तैयार किये गये हैं। आज भी इसक लिये दवाई खोज रहे हैं।
आसाढ़ के महिने में बीमारियां ज्मादा फैलती है और भरी गर्मी में भी। मलेरिया ,फ्लू और हैजा ही फैला करता था।मुझ वह दिन आज याद आ रहे हैं जब हैजा फैला करता था और माता फैलती थी तब एक जिले से दूसरे जिले में जाना मना रहता था।
आज से पचास साल पहले तक किसी भी बीमारी की महामारी फैलती थी तो दवाई तो रहती थी, बचाव का टीका भी लगता था। हम लोग कई बार रायपुर और दुर्ग के बीच बहने वाली नदी के पहले टीका लगवाये हैं। उसके बाद एक पर्ची मिलती थी उसे नदी के उस पार दिखाते थे। उसके बाद ही दूसरे शहर में जा सकते थे। सामान भी लाना ले जाना मना रहता था, सामान याने धान चना गेहूं सब्जियां।
तब और अब में बहुत अंतर आ गया है। आज सोशल मिडिया के कारण कोई भी समाचार एक सेकंड में पूरे विश्व में फैल जाती है।
इस कोरोना का समाचार भी फैल गया पर इसका बचाव नहीं है। इसे 15 दिन के लिये अलग रखा जाता है और किटाणुरहित करते रहते हैं। अब मलेरिया की दवाई कारगर साबित हो रही है। हमारे यहां जगन्नाथ भगवान आसाढ़ में बीमार पड़ जाते हैं। इनको पंद्रह दिन अलग रखा जाता है।उनके दर्शन नहीं होते हैं। भोग में काढ़ा चढ़ाते हैं। यही बांटा जाता है। इसका मतलब यही है किभारत में इन सबकी दवाई तो है ही और सावधानी भी है।आज का पंद्रह दिन का आयसोलेशन जगन्नाथ भगवान की तरह ही लग रहा है। शायद यह काढ़ा ही इस बीमारी का इलाज हो। भारत में आज सब मंदिर बंद हो गये हैं भीड़ से बीमारी फैलती है यह बात सबको समझ में आ गई है। झाड़ फूक और गांव बांधने वाले नजर नहीं आ रहे हैं। न तो पजा पाठ तंत्र मंत्र भी हम सबसे दूर है। बल्कि मंदिर बंद हो गये। जागृति बहुत आ गई है। भारत आज सबका अगुवा बनने जा रहा है। सभी के चेहरे पर कोरोना के भय के साथ खुशी भी है।

प्रकृति अपना संतुलन बना लेती है। मनुष्य स्वार्थी हो रहा है। अपने स्वार्थ के लिये बड़े बड़े पेड़ काट रहा है। खेतों पर कांक्रिट के जंगल बन रह हैं। मानव जनसंख्या बढ़ रही है। जीवों की संख्या कम हो रही है। जीवों में कई प्रजातियां लुप्त हो रही हैं। तरह तरह की बीमारियां हो रही है। बाढ़ आ रही है, सुनामी का प्रकोप भी लोगों ने झेला है। कहीं सूखा कहीं वर्षा , असमय बारीश और ओले गिर रहे हैं। ग्लेशियर पिघल रहे हैं इन सारी बातों से यही पता चलता है कि प्रकृति अपना कोप दिखा रही है। भूकम्प से हजार जाने चली जाती हैं। इन सबसे सैकड़ो जान तो जा रही है, पौधों और जीवों की प्रजातियां भी समाप्त हो रही है। यह कोरोना वायरस भी इसी का एक हिस्सा है।आज मानव मांसाहारी से दूर हो रहा है।अब लोगों को समझ रहा है कि पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है। अभी तक बरीश होना और कोरोना का फैसला यह भी संकेत दे रहा है कि भी और भी जाने जायेंगी। प्रकृति का कोप बाकी है।

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