रविवार, 26 जुलाई 2020

संघर्ष में खोता जीवन

सुशांत सिंह राजपूत अपने संघर्ष पूर्ण जीवन से हार गया। ऐसा क्यों? उसने जो चाहा सब तो मिलते चला गया। नहीं मिली तो कुछ फिल्में और नहीं मिला तो आगे बढ़ने का रास्ता। यह अंधेरा तो कुछ समय के लिये ही होता है। क्या कभी ऐसा हुआ है की सूरज न निकला हो? मौत का कारण अवसाद और तनाव बताया जा रहा है। पांच छै महिने से ईलाज चल रहा था। हंसता हुआ बच्चा सुबह आराम से जूस पीकर लटक गया, चौतीस साल की उम्र में ऐसा करना बहुत ही विचारणीय घटना है।

सुशांत का जन्म 21 जनवरी 1986 को पटना में हुआ था। स्कूली शिक्षा पटना के सेंट केरेंस स्कूल में हुई थी। उसके बाद दिल्ली चले गये। दिल्ली के कुलाची हंसराज मॉडल स्कूल में स्कूली शिक्षा पूरी किये। मेकेनिकल इंजिनियर बनते बनते तीन साल में पढ़ाई छोड़कर डांस की तरफ चले गये। सुशांत बैक डांसर थे। वे कोरियोग्राफर श्यामक डावर के पास डांस सीखे। उनके छात्र थे। उसे देखकर बालाजी टेलिफिल्म्स वालों ने सुशांत को धारावाहिक " किस देश में है मेरा दिल " में काम करने के लिये ले लिया। उसके बाद जी टी वी में " पवित्र रिश्ता " में काम किया। धीरे धीरे काम बढ़ना शुरु हो गया। इसके बाद रियलिटी शो" जरा नच के दिखा - 2" और" झलक दिखला जा -4". में भी दिखे थे।

इसके बाद सुशांत फिल्म की तरफ कदम बढ़ाये।" काय पो चे " पहली फिल्म थी जिससे फिल्मी दुनिया में कदम रखे।इसमें शुद्ध देशी रोमांस था। उसके बाद केदारनाथ और छिछोरे में काम किये। धोनी फिल्म में सुशांत की अलग ही पहचान बनी। आखरी फिल्म " दिल बेचारा "24 जुलाई को डिजिटल प्लेटफार्म पर रिलिज होगी।

इतने कम उम्र में सुशांत को बहुत कुछ मिल गया था। जिस ऊंचाई पर पहुंचना था वहां पर पहुंच ही रहे थे। रातो रात स्टार तो बहुत कम लोग ही बन पाते हैं। बहुत बढ़िया डांसर था, खिलाड़ी था। मेहनती, टैलेंटेड, दिलेर और खिलाड़ी था। वे कोरियोग्राफर श्यामक डावर के शिष्य थे। सुशांत 2006 में कामन वेल्थ खेल में भी डांस कने का मौका मिल चुका था मशहूर डायरेक्टर अलन अमीन से सुशांत ने मार्शल आर्ट सीखा था।

हर इंसान के जीवन में परिस्थितियां एक सी नहीं रहती हैं। समय बदलता है ,जीवन में उतार चढ़ाव आता है। कुछ लोगों ने सुशांत को काम देने से मना कर दिया। वह मध्यमवर्गीय परिवार का था तो कुछ अभिनेत्रियां साथ में काम नहीं करना चहती थी। धीरे धीरे सुशांत को निराशा ने घेरना शुरु दिया। कुछ लोगों का कहना था की सुशांत छै माह से अवसाद और तनाव से गुजर रहा था। उसका इलाज चल रहा था।

सुशांत के पास बहुत पावर वाला टलिस्कोप था । उसे शनिग्रह से वलय को देखना बहुत अच्छा लगता था। उसे तारों की दुनियां बहुत पसंद थी। सुशांत ने चाँद पर जमीन खरीदी थी, ऐसा करने वाले वे पहले व्यक्ति थे। खुशियों की दुनिया में विचरण करने वाला व्यक्ति एकाएक जीवन से हार जाये ,समझ से बाहर है। कई कार ,बंगला और पैसा बस कुछ उसके पास था पर जीवन में कुछ ज्यादा पाने की लालसा ने उसे जमीन से दूर कर दिया।

एक किसान जब कर्ज और अकाल की मार को सह नहीं पाता है तो फांसी लगा लेता है। पति पत्नी के बीच के झगड़े में बच्चों को मार कर फांसी में लटक जाते हैं। पुलिस लोगों की सुरक्षा के लिये रहती है पर थोड़े से तनाव में कोई एक अपने को गोली मार लेता है। यदि
हम यह सब मरे वालों की बात न करें तो.बेहतर हैं। बहुत से अपने जीवन से हारे लोग भी जी रहे हैं। कल जो लोग बड़े थे वे आज छोटे हैं। फिल्म क्षेत्र में बहुत ही महत्वाकांक्षी लोग ही आत्महत्या किये हैं वरना बहुत से लोग सामान्य जीवन जी रहे हैं। एक बार अमिताभ बच्चन जी भी कर्ज में डूब गये थे पर उनको एक फिल्म मिलते ही सब तनाव समाप्त हो गया। सुशांत के पास टैलेंट के नाम पर क्या नहीं था? डांस, मार्शल आर्ट, थियेटर फिल्म, फिर तारों की दुनियां। एक पढ़ा लिखा बुद्धीमान लड़का माँ को याद करता रहा और शायद उसी मां से मिलने तारों के पास चला गया। वह भूल गया कि उसके पीछे शोहरत और लोगों का प्यार उसे याद करेगा।

यह घटना आज की युवा पीढ़ी के लिये एक सीख है। जीवन जीने के लिये होता है। जीवन में कठिनाइयां आते रहती है। हमें उससे लड़ना है। अपने लिये नये नये रास्ते खोजना है और आगे बढ़ना है। प्रकृति ने जीने के लिये बनाया है। यह यादें आज डायरी के इस पन्ने पर अंकित हो गई। जो हमेंशा याद दिलायगी कि कैसे एक होनहार कलाकार जो अभी बच्चा ही था ,बिना किसी सहारे के अपनी मेहनत से ऊंचाई को छूने ही वाला था कि लोग उसे गिराने में लग गये। नमन है ऐसे कलाकार को।

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